दिल
रो दिया देख दर्दनाक मंज़र
रोकर
कर दिए हमने खार समंदर
कब
तलक यूँ ही सहते रहेंगे हम
आक्रोश
भर चूका दिल के अन्दर
तुम्हारी
लकीरों में हार लिखी है
मियाँ
पोरस हो तुम,नहीं सिकंदर
ताश
के खेल में मजा बहुत है
लत
लगे तो बन जाए भयंकर
दिन
यूँ ही कट गया फिर आज
‘शुभम’
कुछ भी न किया सुन्दर
शुभम मिश्र 'अज़ीम'
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