Sunday, 24 April 2016

बापू का देश........

बापू का यह देश दोस्तों 
लगती जैसे बड़ी दुकान
अपने-अपने हिस्से का सब 
बेच रहे है हिन्दुस्तान 

पंडित बेच रहे तीर्थों को 
और पुजारी गावों को 
घाट-घाट पर बेच रहे हैं 
नाविक ही खुद नावों को
गली-गली में ध्वज बिकता 
चौराहों पर बिकते गान 
अपने-अपने हिस्से.......

विद्या बेच रहे अध्यापक 
और चिकित्सक बेचे जान 
लोहा बेच रहे अभियंता 
अपना भारत देश महान 
बेच रहा कर्तव्य परायण 
बीवी -बच्चे का सम्मान |
अपने-अपने हिस्से........

बूथ-बूथ पर वोट बिक रहा 
राजनीती हुई महान 
पैसे हो तो तुम भी ले लो 
लाठी गोली बम पिस्तौल |
माली बेच रहा गुलशन को 
और कोकिला बेचे तान |
अपने-अपने हिस्से........

अधिकारी अध्यक्ष बिकते 
बिकते यहाँ विधायक भी 
मंत्री बिकते नेता बिकते 
सेवक सचिव सहायक भी 
गाँधी जी का कफ़न बेचने 
निकली है उनकी संतान |
अपने-अपने हिस्से......

जाओ कुछ पैसे बटोर लो 
विक्रय के बाज़ार में 
मैं भी खुद को बेच रहा हूँ 
चोरों के बाजार में 
पद मर्यादा न्याय बिकता 
डिग्री जैसे बीडी पान 
अपने-अपने हिस्से........

कोई बेचे कश्मीर को 
कोई बेचे सियाचिन को 
कहीं बीके कारगिल हिमालय 
मानसरोवर बद्री-धाम 
कहीं-कहीं तो बिक रहा है 
बिना मोल भोला इंसान 
अपने-अपने हिस्से का 
सब बेच रहे हैं हिंदुस्तान.......||||

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